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April 24, 2024

माफिया मुख़्तार अंसारी का गुंडे से नेता बनने तक का सफर

उत्तर प्रदेश में अपराध और राजनीति दोनों ही दुनिया में अपने पैर फैलाने वाले ‘बाहुबली’ मुख्तार अंसारी की गुरुवार रात को हार्ट अटैक से मौत हो गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि उनकी मौत से कई दिन पहले मुख़्तार ने बयान दिया था कि उन्हें स्लो पॉइजन दिया जा रहा है। गैंगस्टर-राजनेता पर हत्या से लेकर जबरन वसूली तक के 65 आपराधिक केस दर्ज किए गए थे। इसके अलावा वे कई राजनीतिक दलों के टिकट पर पांच बार विधायक चुने गए थे।

मुख्तार अंसारी का जन्म 3 जून 1963 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में हुआ था। उनके पिता सुबहानउल्लाह अंसारी एक स्वतंत्रता सेनानी थे और चाचा मोहम्मद हसन अंसारी भारत के उपराष्ट्रपति रह चुके थे। इतनी सम्मानित परिवार से होने के बावजूद भी उनके जीवन ने एक अलग मोड़ ले लिया और वह गैंगस्टर बन गए।

मुख्तार अंसारी का जीवन विवादों से भरा रहा है। 1980 के दशक में उन्होंने अपराध की दुनिया में प्रवेश किया और जल्द ही गाजीपुर और आसपास के क्षेत्रों में एक शक्तिशाली माफिया बन गए। हत्या, अपहरण, रंगदारी, और धमकी देने जैसे कई गमगीन अपराधों के आरोप अपने सिर पर लेकर वह जिया करते थे।

मुख़्तार की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 1995 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्र संघ के माध्यम से हुई थी। 1996 में, मुख्तार अंसारी ने पहली बार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था। इसके बाद उन्होंने 2002, 2007, 2012, और 2017 में भी विधानसभा चुनाव जीते। 2014 में, उन्होंने लोकसभा चुनाव भी जीता।

अप्रैल 2023 में MP MLA कोर्ट ने बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के लिए मुख्तार अंसारी को दोषी ठहराया और 10 साल की सजा सुनाई। फर्जी हथियार लाइसेंस मामले में 13 मार्च 2024 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की उनके छह सहयोगियों के साथ सार्वजनिक रूप से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जबकि अंसारी 2005 में एक दंगा मामले में जेल में बंद थे।

2007 में, मुख्तार अंसारी और उनके भाई अफ़ज़ल बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) में शामिल हो गए और 2009 में चुनाव लड़े और भाजपा के मुरली मनोहर जोशी से हार गए। उस समय वह जेल में बंद थे। हालांकि बीएसपी ने 2010 में दोनों भाइयों को यह साबित करने के बाद पार्टी से निष्कासित कर दिया कि वे अभी भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे।

इसके बाद अंसारी बंधुओं ने अपनी पार्टी कौमी एकता दल (QED) बनाई। 2014 में मुख्तार अंसारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ा और हार गये। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले 2016 में मुख्तार अंसारी फिर से बसपा में शामिल हो गए। और फिर 2017 में बसपा उम्मीदवार के रूप में मऊ विधानसभा सीट जीती।

बता दें कि मुख़्तार का गुंडागर्दी और गैंगस्टरगिरी का बहुत बड़ा नेटवर्क था। मुख़्तार का मतलब होता है “The Chosen One”. यानी जिसे एक महत्वपूर्ण काम के लिए चुना गया हो। लेकिन, इनको शुभ काम के लिए नहीं बल्कि अपराधों के लिए चुना हुआ कहा जा सकता है। मुख़्तार का नेटवर्क 8 राज्यों में ऑपरेट किया जाता था। और उनके खिलाफ तकरीबन 50 केस दर्ज थे। अपराध करने की उन्हें इतनी बुरी लत लगी कि जेल में होने के बावजूद भी वह गैर कानूनी काम किया और करवाया करते थे।

उत्तर प्रदेश में भी मुख़्तार के गुंडा गर्दी का दबदबा रहा। लेकिन, 2005 में मऊ आंदोलन के दौरान योगी आदित्यनाथ के काफिले पर हमला करना, उत्तर प्रदेश में उसकी इस गुंडागर्दी का पतन था। उन्होनें अपनी ज़िन्दगी के तकरीबन 20 साल जेल में बिताए।

लेकिन जब योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो मुख़्तार के लिए खतरा बढ़ गया। इसकी वजह थी प्रदेश में माफिया तत्वों के विरुद्ध योगी सरकार का अडिग रुख। अपनी जान की परवाह करते हुए मुख़्तार ने अपना ट्रांसफर पंजाब के रोपड़ जेल में कर लिया था।