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July 15, 2024
air pollution

Study: वायु प्रदुषण से भारत में 10 शहरों में 33,000 मौतें, दिल्ली में सबसे खराब स्थिति

नई दिल्ली: वायु प्रदूषण भारत में एक गंभीर खतरा बना हुआ है, जिसके कारण हर साल हजारों लोगों की जान जाती है। हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, देश के 10 सबसे बड़े शहरों में 2008 और 2019 के बीच वायु प्रदूषण के कारण 33,000 से अधिक मौतें हुईं। यह संख्या चिंताजनक है, खासकर जब यह ध्यान रखा जाए कि भारत पहले से ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित स्वच्छ वायु मानकों से अधिक है।

स्टडी में दी गई अहम जानकारियां

  • अध्ययन में शामिल शहर: अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई, पुणे, शिमला और वाराणसी।
  • मौतों की संख्या: 2008 और 2019 के बीच इन 10 शहरों में 33,000 मौतें हुईं।
  • प्रभावित आबादी: अध्ययन में शामिल शहरों में रहने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं।
  • स्वास्थ्य प्रभाव: वायु प्रदूषण से सांस लेने में तकलीफ, हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़ों का कैंसर और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
  • सबसे खराब शहर: दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर सबसे खराब है, जहां हर साल 12,000 मौतें होती हैं।
  • अन्य शहर: वाराणसी (830 मौतें), बेंगलुरु (2,100 मौतें), चेन्नई (2,900 मौतें), कोलकाता (4,700 मौतें) और मुंबई (5,100 मौतें) भी गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
  • शिमला में भी खतरा: शिमला में वायु प्रदूषण का स्तर अपेक्षाकृत कम है, लेकिन यह अभी भी स्वास्थ्य के लिए खतरा है। 2008 और 2019 के बीच, शिमला में वायु प्रदूषण के कारण 59 मौतें हुईं।

सुधार के लिए क्या किया जा सकता है:

  • वायु गुणवत्ता मानकों को सख्त करना: भारत को WHO द्वारा निर्धारित वायु गुणवत्ता मानकों को अपनाना चाहिए और उन्हें लागू करने के लिए अधिक सख्त कदम उठाने चाहिए।
  • वायु प्रदूषण के स्रोतों को कम करना: वाहनों से निकलने वाले धुएं, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली जलाने जैसे वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
  • सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना: लोगों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  • हरित क्षेत्रों को बढ़ाना: पेड़ और पौधे वायु प्रदूषकों को अवशोषित करने में मदद करते हैं, इसलिए शहरों में हरित क्षेत्रों को बढ़ाना महत्वपूर्ण है।

वायु प्रदूषण भारत में एक गंभीर समस्या है जिससे हर साल हजारों लोगों की जान जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। स्वच्छ हवा हर नागरिक का अधिकार है, और हमें इसे प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करना होगा।