CATEGORIES

February 2025
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
2425262728  
Friday, February 28   3:51:51

कब मिलेगा पुरुषों को न्याय ? आत्महत्या से पहले मानव शर्मा के दर्दनाक संदेश ,अतुल सुभाष जैसा एक और मामला उजागर

“The law needs to be protected men” ये आखिरी शब्द TCS कर्मचारी मानव शर्मा के है जहां उन्होंने अपने 6.57 सेकेंड की एक वीडियो बनाने के बाद आत्महत्या को अंजाम दिया है..

चर्चा का कारण -: आगरा निवासी मानव शर्मा जिन्होंने 24 फरवरी की सुबह 5:00 बजे आत्महत्या को अंजाम दिया जिसका मुख्य कारण पत्नी से लगातार मिलने वाली मानसिक प्रताड़ना और उत्पीड़न है
मानव ने आत्महत्या से पहले अपनी वीडियो में कहा मम्मी सारी, पापा सारी,अकू सारी मैं आप सभी से अलविदा लेता हूं” और गुहार की “मर्दों के बारे में सोचो वो अकेले हो जाते है कानून पुरुषों की रक्षा के लिए होना चाहिए”
मानव के पिता एयर फोर्स से रिटायर्ड नरेंद्र शर्मा ने गुरुवार 27 फरवरी को मुख्यमंत्री शिकायत पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की और कहां “मैं सिस्टम से सिर्फ न्याय चाहता हूं जिसके कारण आने वाले समय में किसी अन्य को इस तरह का कम ना उठाना पड़े”

आज के समय में ये अतिशयोक्ति नहीं है कि भारत में महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के लिए कई कानून बनाए गए हैं, लेकिन पुरुषों की सुरक्षा से संबंधित कानूनों की चर्चा कम होती है। हालाँकि, भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है और कुछ ऐसे कानून भी हैं जो पुरुषों के अधिकारों की रक्षा करते हैं। इस लेख में हम पुरुषों की सुरक्षा से जुड़े प्रमुख कानूनों पर चर्चा करेंगे।

झूठे दहेज उत्पीड़न मामलों से सुरक्षा (IPC की धारा 498A का दुरुपयोग)
भारतीय दंड संहिता की धारा 498A दहेज उत्पीड़न को रोकने के लिए बनाई गई थी, लेकिन कई बार इसका दुरुपयोग करके निर्दोष पुरुषों और उनके परिवारों को झूठे मामलों में फँसा दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि यदि यह साबित हो जाए कि मामला झूठा है, तो महिला पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

झूठे यौन उत्पीड़न और बलात्कार के आरोपों से बचाव
हाल के वर्षों में झूठे बलात्कार के मामलों की संख्या बढ़ी है, जिससे निर्दोष पुरुषों को मानसिक और सामाजिक रूप से कष्ट उठाना पड़ता है। यदि कोई पुरुष यह साबित कर दे कि लगाए गए आरोप झूठे थे, तो महिला के खिलाफ IPC की धारा 182 (झूठी सूचना देना) और 211 (गलत आरोप लगाना) के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।

पुरुषों के लिए घरेलू हिंसा से सुरक्षा
हालांकि घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 मुख्य रूप से महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, लेकिन कई पुरुष भी घरेलू हिंसा का शिकार होते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में कहा है कि यदि पुरुष अपने साथ हो रहे मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न को साबित कर दें, तो वे न्याय के हकदार हैं।

तलाक और गुजारा भत्ता मामलों में न्याय
तलाक के मामलों में आमतौर पर महिलाओं को गुजारा भत्ता देने का प्रावधान है, लेकिन यदि पुरुष आर्थिक रूप से कमजोर है और महिला सक्षम है, तो पुरुष भी गुजारा भत्ता मांग सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में यह स्पष्ट किया है कि न्याय दोनों पक्षों के लिए समान होना चाहिए।

कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा
महिलाओं की तरह पुरुष भी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का शिकार हो सकते हैं। हालाँकि, भारत में पुरुषों के लिए कोई विशेष कानून नहीं है, लेकिन IPC की धारा 354 (शीलभंग से संबंधित अपराध) और धारा 509 (महिला के सम्मान को ठेस पहुँचाने वाले शब्द या इशारे) के तहत यदि कोई पुरुष साबित कर सके कि उसका उत्पीड़न हुआ है, तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

आत्महत्या रोकथाम और झूठे मामलों से सुरक्षा (IPC की धारा 306 और 309)
कई पुरुष घरेलू हिंसा, तलाक, या झूठे आरोपों की वजह से मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या कर लेते हैं। यदि किसी पुरुष को झूठे आरोपों के कारण आत्महत्या के लिए उकसाया जाता है, तो आरोप लगाने वाले के खिलाफ IPC की धारा 306 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।

पुरुषों के लिए संरक्षण गृह और कानूनी सहायता
महिलाओं की तरह पुरुषों के लिए कोई विशेष संरक्षण गृह नहीं होते, लेकिन कुछ गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और पुरुष अधिकार संगठनों ने इस दिशा में काम करना शुरू किया है। पुरुष अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए कोर्ट में निःशुल्क कानूनी सहायता भी ले सकते हैं।

हालाँकि भारत में पुरुषों के लिए सीधे तौर पर कई सुरक्षा कानून नहीं हैं, लेकिन न्यायपालिका और कुछ संवैधानिक प्रावधान उनके अधिकारों की रक्षा करने का प्रयास करते हैं। समाज में पुरुषों के अधिकारों को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए, जितना महिलाओं के अधिकारों को। झूठे मामलों में फँसे पुरुषों को न्याय मिलना चाहिए और उनकी मानसिक, शारीरिक और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।

“न्याय सबके लिए – समान अधिकार, समान सुरक्षा!”