“घर की दीवारें अगर बातें कर पातीं, तो शायद कई कहानियाँ चीख-चीख कर इंसाफ मांगतीं!”
कानपुर की इस दिल दहला देने वाली घटना ने रिश्तों की नाजुक डोर को उजागर कर दिया। एक पति, अजय, जो खुद को चोट पहुँचा रहा था, और एक पत्नी, जो मुस्कुराते हुए खड़ी रही – यह दृश्य जितना चौंकाने वाला था, उससे कहीं ज्यादा डरावना भी।
क्या है पूरी घटना.? अजय और उसकी पत्नी के बीच लंबे समय से अनबन चल रही थी। घरेलू कलह का स्तर इतना बढ़ गया कि अजय ने खुद को नुकसान पहुँचाना शुरू कर दिया। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि उसकी पत्नी यह सब देखकर चुप नहीं रही, बल्कि मुस्कुराते हुए कहा,
“बेटे से नहीं मिल पाओगे, पूरा परिवार जाएगा जेल!”
यह सुनकर आसपास के लोग और अजय के परिजन सन्न रह गए। क्या यह गुस्से में दिया गया बयान था, या इसके पीछे कोई गहरी चाल थी?
एक रिश्ते की बर्बादी – कैसे शुरू हुआ यह सब?
अजय और उसकी पत्नी की शादीशुदा जिंदगी पहले सामान्य थी, लेकिन वक्त के साथ रिश्तों में कड़वाहट बढ़ती गई। पारिवारिक झगड़े, आपसी अविश्वास और अहंकार ने रिश्ते को इतना जहरीला बना दिया कि हालात आत्म-हानि तक पहुँच गए।
“रिश्ते फूलों की तरह होते हैं, अगर देखभाल न की जाए, तो वो मुरझा जाते हैं और फिर कांटे छोड़ जाते हैं!”
क्या यह सिर्फ एक घरेलू मामला था?
कुछ सूत्रों का कहना है कि अजय की पत्नी ने यह सब जानबूझकर किया। कहीं न कहीं उसकी मंशा थी कि अजय को कमजोर कर दिया जाए, ताकि वह खुद अपनी जिंदगी की जंग हार जाए। पुलिस इस एंगल से भी मामले की जाँच कर रही है।
कानूनी नज़रिया – क्या होगा आगे?
इस मामले में पुलिस ने अजय के बयान लिए हैं और घरेलू हिंसा एवं मानसिक उत्पीड़न के पहलुओं पर जांच की जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार,
“अगर किसी व्यक्ति को जानबूझकर मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित किया जाता है, तो वह भी घरेलू हिंसा के तहत अपराध माना जाता है।”
अगर अजय मानसिक तनाव का शिकार हुआ है, तो उसकी पत्नी पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
समाज के लिए एक सबक
यह घटना सिर्फ अजय और उसकी पत्नी की नहीं है। ऐसे लाखों घरों में रिश्तों में कड़वाहट की दीवारें खड़ी हो रही हैं। हमें यह समझने की जरूरत है कि एक रिश्ता सिर्फ प्यार से नहीं चलता, उसमें विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता भी होनी चाहिए।
“अगर रिश्ते में सम्मान और समझदारी खत्म हो जाए, तो वह रिश्ता सिर्फ एक जंजीर बनकर रह जाता है।”
आप क्या सोचते हैं? क्या इस तरह के मामलों में समाज को हस्तक्षेप करना चाहिए? क्या कानून ऐसे मामलों में और सख्त होना चाहिए? अपने विचार हमें बताएं!

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