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नालंदा की वो मस्जिद जिसकी देखभाल करते हैं हिंदू, सांप्रदायिक सद्भावना की अद्भुत मिसाल

भारत एक ऐसा देश है जो अपनी सांस्कृतिक विविधता और धर्मनिरपेक्षता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां हर धर्म और समुदाय की अपनी परंपराएं और मान्यताएं हैं, जिन्हें आदर और सम्मान के साथ अपनाया जाता है। लेकिन, कभी-कभी इस देश की सांप्रदायिक सद्भावना पर सवाल उठते हैं। फिर भी, नालंदा जिले के माड़ी गांव की एक कहानी इस तथ्य को प्रमाणित करती है कि भारत के दिल में आज भी इंसानियत और सौहार्द की गहरी जड़ें मौजूद हैं।

भारत में एक ओर उत्तर प्रदेश के संभल इलाके की कहानी है, जहां 50 वर्षों से एक मंदिर बंद पड़ा है। इसकी वजह यह है कि उस इलाके में रहने वाले सभी हिंदू पलायन कर चुके हैं, और वहां अब लगभग 100% मुस्लिम आबादी है। इसके विपरीत, नालंदा के माड़ी गांव में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिलती है। यह गांव लगभग पूरी तरह से हिंदू बहुल है, क्योंकि यहां रहने वाले मुस्लिम समुदाय ने किसी कारणवश पलायन कर लिया है। लेकिन यहां के हिंदू समाज ने 100 साल पुरानी एक मस्जिद को पूरी तरह से संरक्षित रखा है और उसकी देखभाल ठीक उसी प्रकार की जाती है जैसे किसी मंदिर की होती है।

मस्जिद की देखभाल: एक मिसाल

माड़ी गांव के हिंदू समाज के लोगों ने यह सुनिश्चित किया है कि मस्जिद की पवित्रता और पहचान बनी रहे। यहां के ग्रामीण न केवल मस्जिद की सफाई और देखरेख करते हैं, बल्कि मस्जिद में पेन ड्राइव के माध्यम से माइक पर दिन में पांच बार नमाज भी अदा की जाती है। यह दिखाता है कि धर्म और समुदाय से ऊपर इंसानियत और सह-अस्तित्व का भाव होना चाहिए।

100 साल पुरानी मस्जिद का महत्व

यह मस्जिद लगभग 100 साल पुरानी है और इसका निर्माण गांव के एक जमींदार ने कराया था। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मस्जिद में एक ऐसा पत्थर है जिसे घिसकर लगाने से गाल की सूजन ठीक हो जाती है। यह मस्जिद आज भी ग्रामीणों के विश्वास और श्रद्धा का केंद्र है। गांव में जब भी किसी के घर शादी होती है, तो लोग सबसे पहले इस मस्जिद में मत्था टेकने आते हैं।

हालांकि, गांव में कुछ अप्रिय घटनाओं के कारण हाल के महीनों में मस्जिद की देखभाल थोड़ी बाधित हुई है। फिर भी, ग्रामीणों का मानना है कि यह मस्जिद केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उनके पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है, जिसे सहेजना उनकी जिम्मेदारी है।

माड़ी गांव: ज्ञान और सौहार्द की धरती

नालंदा, जिसे प्राचीन काल से ही ज्ञान और शिक्षा की भूमि माना जाता है, आज भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। माड़ी गांव की यह कहानी न केवल भारत की विविधता को दर्शाती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि धर्म केवल इंसानियत को जोड़ने का एक माध्यम है, न कि उसे विभाजित करने का।

इस प्रकार, माड़ी गांव का उदाहरण भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को मजबूती प्रदान करता है और दिखाता है कि जब तक हमारे दिलों में सह-अस्तित्व और आपसी सम्मान का भाव रहेगा, भारत दुनिया के लिए प्रेरणा बना रहेगा।