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Osho Death Anniversary: जानें रजनीशपुरम और ओशो के बारे में कुछ रोचक बातें

Osho Death Anniversary: ओशो, जिनका असली नाम रजनीश चंद्र मोहन था, एक आध्यात्मिक गुरु थे। उन्हें जबलपुर में 21 वर्ष की आयु में 21 मार्च 1953 मौलश्री वृक्ष के नीचे संबोधि की प्राप्ति हुई। उन्होंने रजनीषी आंदोलन शुरू किया था। भारत में से निकाले जाने के बाद रजनीश 1981 में अमेरिका चले गए और अगले ही साल उन्होंने रजनीशपुरम की स्थापना की।

रजनीशपुरम की विवादास्पद कहानी

रजनीश आंदोलन 1970 और 1980 के दशक में हिंदू और ईसाई नैतिकता के प्रति संस्थापक की शत्रुता के कारण भी विवादास्पद था। रजनीश ने रूढ़िवादी भारतीय धर्मों को मृत और खोखले कर्मकांडों से भरा हुआ बताकर आलोचना की। उन्होंने विवाह पर भी आपत्ति जताई और नव-संन्यासियों को स्वतंत्र प्रेम के सिद्धांत के तहत एक साथ रहने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने गर्भनिरोधक और गर्भपात का समर्थन किया, अपने समुदायों में बच्चों के जन्म को रोकना चाहते थे। रजनीश को “सेक्स गुरु” और “अमीरों का गुरु” भी कहा जाता है।

रजनीशपुरम काफी विवादित बस्ती थी। कहा जाता है कि अनुयायियों पर आव्रजन धोखाधड़ी, वायरटैपिंग, स्थानीय चुनाव में धांधली के प्रयास और जैव आतंकवाद का आरोप लगाया गया था, एक आरोप जिसमें कहा गया था कि उन्होंने साल्मोनेला के साथ स्थानीय रेस्टोरेंट में भोजन को दूषित कर दिया था, जिससे 700 से अधिक लोग बीमार हो गए थे।

ओशो रजनीश का अत्यधिक जीवन विवादित ही रहा है। उनकी विचारधारा, उनके काम करने का तरीका, सबकुछ विवाद का विषय ही रहा।