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21वीं सदी में कॉर्पोरेट मैनेजमेंट का नया दौर

21वीं सदी में कॉरपोरेट प्रबंधन तेजी से बदल रहा है। 20वीं सदी के उत्तरार्ध में कॉरपोरेट प्रबंधन में रणनीतिक प्रबंधन (Strategic Management) की अवधारणा का विकास हुआ और कंपनियों ने अपने मिशन, विजन और मूलभूत मूल्यों (Core Values) को परिभाषित करना शुरू किया। 21वीं सदी में भी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य बिक्री और लाभ बढ़ाना है, लेकिन वे अब ग्राहकों को ‘पैसे के बदले मूल्य’ (Value for Money) और ‘ग्राहक संतुष्टि’ (Customer Satisfaction) प्रदान करके अपनी बिक्री बढ़ाना चाहती हैं।

जनसंख्या के दृष्टिकोण से दुनिया के दो सबसे बड़े देश, भारत और चीन का प्रबंधन संस्कृति अधिक से अधिक प्रभावी होती जा रही है। लेकिन अभी भी इन देशों की प्रबंधन शैली नकल आधारित (Imitative) है। पश्चिमी जगत ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया है और नवाचार (Innovation) में अपनी दक्षता साबित की है। पिछले सौ वर्षों में पश्चिमी देशों ने जो आविष्कार किए हैं, वे आश्चर्यजनक हैं, जैसे – रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, कार, मूक फिल्मों से लेकर सजीव और रंगीन फिल्में, वॉशिंग मशीन, मिक्सर-ग्राइंडर, प्रेशर कुकर, बिजली से चलने वाली वस्तुएं, हवाई जहाज, एंटीबायोटिक्स, बायपास सर्जरी, कपड़े सिलने की मशीन, सिंथेटिक फाइबर, प्लास्टिक, पॉलिथीन, एनेस्थीसिया, रेडियो, टेलीविजन, कंप्यूटर, मोबाइल फोन, कुकिंग गैस, लेजर तकनीक, परमाणु ऊर्जा, क्वांटम मैकेनिक्स आदि।

पश्चिमी देशों ने 18वीं और 19वीं सदी में स्टीम इंजन और रेलवे सिस्टम की खोज की, जबकि 17वीं और 18वीं शताब्दी में स्टेथोस्कोप, टेलीस्कोप और टेलीग्राफ की खोज हुई। हालांकि, 2500 वर्ष पहले भारत ने योग की पद्धति विकसित की थी और चीन ने रेशम के कपड़े की खोज की थी। भारत ने शून्य की खोज के बाद आध्यात्मिकता को प्राथमिकता दी और भौतिक जगत को गौण माना, जिससे प्रौद्योगिकीय विकास में पिछड़ गया।

अब आधुनिक प्रबंधन का जोर ‘मास प्रोडक्शन’ और ‘मास डिस्ट्रीब्यूशन’ को सस्ता और व्यापक बनाने पर है। कॉरपोरेट क्षेत्र में अनुसंधान और विकास (R&D) का महत्व बढ़ गया है, और कंपनियां नई-नई उत्पाद और वितरण प्रणालियों (जैसे ड्रोन द्वारा डिलीवरी) पर काम कर रही हैं। सीमेंट, लोहा, वस्त्र, रसायन, दवाइयाँ, जूते, पैक्ड फूड और मसाले, कार और स्कूटर, ट्रैक्टर, खाद्य तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कागज और किताबों का उत्पादन सस्ता और प्रभावी बनाना जरूरी हो गया है ताकि बढ़ती जनसंख्या की जरूरतें पूरी की जा सकें।

अब कॉरपोरेट जगत को सिर्फ शोषणकारी दृष्टि से नहीं देखा जाता, बल्कि यह नवाचार को भी बढ़ावा देता है। कंपनियों ने अनुसंधान और विकास (Research & Development) को संस्थागत रूप (Institutionalized) दे दिया है। अब केवल सरकारें अनुसंधान नहीं कर रहीं, बल्कि कॉरपोरेट कंपनियां भी इसमें सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

अब सवाल यह है कि क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और रोबोटिक्स मानवता को अधिक स्वतंत्र बनाएंगे या मानवता को इनका गुलाम बना देंगे? प्रत्येक तकनीकी क्रांति मानवता में आशा और भय दोनों उत्पन्न करती है।

इतिहास में देखा गया है कि हर नई तकनीकी क्रांति का आरंभिक विरोध होता है। 1760 में औद्योगिक क्रांति की शुरुआत में इंग्लैंड में मजदूरों ने मशीनें तोड़ दी थीं, क्योंकि उन्हें लगा कि मशीनें उनकी नौकरियाँ छीन लेंगी। लेकिन समय के साथ, तकनीकी प्रगति ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई और जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया।

21वीं सदी में प्रत्येक राष्ट्र को अपनी अस्तित्व रक्षा (Survival) के लिए सीखने वाली संगठनात्मक संरचनाएँ (Learning Organizations) बनानी होंगी। यह समय प्रबंधन और नवाचार को संतुलित करने का है ताकि मानवता भविष्य में तकनीकी क्रांति का लाभ उठा सके, न कि उसके दुष्प्रभावों का शिकार बने।