भारतीय सिनेमा के सुनहरे युग के महानायक, मनोज कुमार, अब इस दुनिया में नहीं रहे। देशभक्ति की भावना को पर्दे पर जीवंत करने वाले इस कलाकार ने अपने जीवन की आखिरी सांसें बेहद तकलीफ में लीं।
उनकी जिंदगी का अंतिम सफर किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। बुढ़ापे की कमजोरियां, बीमारियों का दर्द और शरीर की जटिल समस्याओं ने उन्हें घेर लिया था। उनके चाहने वाले यह देखकर टूट चुके थे कि जो शख्स पर्दे पर हमेशा एक नायक की तरह जिया, वह असल जिंदगी में संघर्ष कर रहा था।
बेटे की नम आँखें और अंतिम विदाई
जब मनोज कुमार की आत्मा ने इस दुनिया को अलविदा कहा, तब उनके बेटे की आँखों में नमी थी। यह नमी सिर्फ आँसू नहीं थे, बल्कि उस प्यार, सम्मान और यादों का अटूट बंधन था, जो एक बेटे को अपने पिता से होता है। उन्होंने कांपते हाथों से अपने पिता का चेहरा छुआ, मानो अभी भी यकीन नहीं हो रहा हो कि अब वे सिर्फ यादों में ही रहेंगे।
“पापा, आप हमेशा हमारे हीरो रहेंगे,” ये शब्द उनके बेटे के थे, जो उस क्षण में पूरे देश के दिल की आवाज बन गए। मनोज कुमार सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, वे सिनेमा की आत्मा थे, जिन्होंने भारतीयता को परदे पर जिया।
एक युग का अंत, लेकिन प्रेरणा हमेशा जीवित रहेगी
मनोज कुमार का जाना सिर्फ एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के एक सुनहरे अध्याय का अंत है। उनकी फिल्में, उनके संवाद और उनकी देशभक्ति आज भी हर सिनेप्रेमी के दिल में बसती है।
उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि एक सच्चा नायक सिर्फ पर्दे पर नहीं, बल्कि अपने विचारों और कर्मों से बनता है। आज वे भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत, उनकी कहानियां और उनकी अमर आवाज हमेशा हमें प्रेरित करती रहेगी।
“हर एक आँख नम है, हर दिल में एक ही सवाल—हमारे ‘भारत कुमार’ अब कहाँ हैं?”

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