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Saturday, April 5   11:27:49

Photo by Dharmesh Parekh

हल्दी के रंग में रंगा महाराष्ट्र, भक्ति की बौछार

“जब पीले रंग में रंग जाती है पूरी हवा, तब समझो महाराष्ट्र में हल्दी उत्सव शुरू हो गया है।”

 

महाराष्ट्र की धरती पर कई रंगीन और भक्ति से भरपूर पर्व मनाए जाते हैं, लेकिन इनमें हल्दी उत्सव (Haldi Festival) अपनी अनोखी परंपरा और जीवंतता के लिए विशेष स्थान रखता है। इस पर्व में आस्था, भक्ति, और आनंद का ऐसा मेल देखने को मिलता है, जो किसी चित्रकला की तरह जीवंत प्रतीत होता है।

 

हाल ही में फ़ोटोग्राफ़र धर्मेश पारेख द्वारा इस उत्सव की कुछ बेहद खूबसूरत तस्वीरें साझा की गई हैं। इन तस्वीरों में जेजुरी के खंडोबा मंदिर, कोल्हापुर के कोडोली स्थित विठ्ठल मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थलों की रंगों में सराबोर छवियां हैं। हर तस्वीर में पीली हल्दी की बौछार, श्रद्धालुओं की भक्ति, और आकाश में उड़ती आस्था दिखाई देती है।

 

पुणे जिले के जेजुरी में स्थित खंडोबा मंदिर महाराष्ट्र के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। खंडोबा को “मराठों का कुलदैवत” कहा जाता है। इन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है, जो असुर मणि-मल्ल को पराजित करने के लिए प्रकट हुए थे। यहाँ हर साल Banai विवाह उत्सव के समय हल्दी का त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है। हज़ारों श्रद्धालु मंदिर की सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर पहुँचते हैं और पीली हल्दी को ‘बानाई’ और ‘खंडोबा’ के विवाह का प्रतीक मानकर एक-दूसरे पर उड़ेलते हैं।

 

कोल्हापुर जिले के कोडोली गांव में स्थित विठ्ठल मंदिर में भी हल्दी उत्सव उसी श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जाता है। यहाँ यह उत्सव विशेष रूप से महिलाएं और युवा बड़े हर्षोल्लास से मनाते हैं। पीले रंग की हल्दी को शुभता, उर्वरता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

 

हल्दी न सिर्फ एक धार्मिक प्रतीक है, बल्कि यह समुदाय के आपसी प्रेम, सौहार्द और एकता को भी दर्शाती है। इस उत्सव में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता; सब एक-दूसरे पर हल्दी उड़ाते हैं, नाचते हैं और भक्ति में लीन हो जाते हैं।

 

यह पर्व महाराष्ट्र की लोकपरंपरा, संगीत, नृत्य और भक्ति की गूंज का ऐसा अद्भुत संगम है, जिसे एक बार देखने वाला जीवन भर नहीं भूलता।

 

जो तस्वीरें हाल ही में सामने आई हैं, वे सिर्फ छवियां नहीं बल्कि आस्था की अनुभूतियाँ हैं। हर तस्वीर पीले रंग से सराबोर श्रद्धालुओं, मंदिर की भव्यता, और एक अद्भुत ऊर्जा को दर्शाती हैं। वे हमें यह एहसास दिलाती हैं कि हमारी सांस्कृतिक विरासत कितनी रंगीन और गहराई से जुड़ी हुई है।

 

हल्दी उत्सव महाराष्ट्र की आस्था का वो रंग है, जो हर वर्ष समाज को एक सूत्र में बाँधता है। यह पर्व सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक उत्सव है प्रेम, परंपरा और पहचान का।