Donald Trump: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने विवादास्पद बयानों के कारण सुर्खियों में हैं। इस बार मामला गाज़ा पट्टी से जुड़ा हुआ है। हाल ही में ट्रम्प ने फिलिस्तीनियों को गाज़ा से बाहर निकालने और इस क्षेत्र को अमेरिका के नियंत्रण में लाने की बात कही। उन्होंने यह तक कह दिया कि गाज़ा को “एक शानदार जगह” बनाया जा सकता है, बशर्ते वहां के लोगों को मिस्र और जॉर्डन भेज दिया जाए।
ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच गई है। करीब 20 लाख लोगों को विस्थापित करने की योजना ना सिर्फ मानवीय संकट को जन्म दे सकती है, बल्कि इस फैसले ने अमेरिका के अपने सहयोगियों को भी ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है।
ट्रंप का गाज़ा प्लान क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप अक्सर अपनी अप्रत्याशित और आक्रामक नीतियों के लिए जाने जाते हैं। उनके फैसले कई बार राजनीतिक सौदेबाजी का हिस्सा होते हैं, लेकिन उनका यह प्रस्ताव बेहद गंभीर और खतरनाक माना जा रहा है।
विश्लेषकों की राय:
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प ने यह बयान इजरायल के दक्षिणपंथी गुटों को खुश करने के लिए दिया है, जो लंबे समय से गाज़ा में अवैध बस्तियां बसाने की योजना बना रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ लोग इसे अरब देशों से गाज़ा के पुनर्निर्माण के लिए फंड जुटाने की चाल मान रहे हैं। ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वॉल्ट्ज ने इसे एक “बड़े क्षेत्रीय समाधान” का हिस्सा बताया।
लेकिन हकीकत यह है कि 20 लाख लोगों को जबरन गाज़ा से निकालने का प्रस्ताव व्यावहारिक रूप से असंभव है और मानवीय दृष्टि से बेहद दर्दनाक भी।
ट्रंप के फैसले का अरब देशों और अमेरिका के सहयोगियों पर असर
- ट्रम्प के इस बयान का सबसे पहला और सख्त विरोध अरब देशों ने किया है।
- सऊदी अरब, जॉर्डन और मिस्र ने साफ शब्दों में कहा कि वे इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेंगे।
- रिपब्लिकन पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी गाज़ा में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती के विचार को अव्यवहारिक बताया।
- अगर अमेरिका इस प्रस्ताव पर एकतरफा कदम उठाता है, तो इससे उसकी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को भारी नुकसान हो सकता है।
क्या अरब देश ट्रम्प के दबाव में आ सकते हैं?
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही अरब देश अभी विरोध कर रहे हैं, लेकिन अमेरिकी दबाव के आगे झुक सकते हैं। हालांकि, फिलहाल जिस तरह का माहौल है, यह प्रस्ताव पूरी तरह से असंभव नजर आ रहा है।
क्या ट्रम्प के इरादे नेतन्याहू की योजना का हिस्सा हैं?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले भी गाज़ा में सैन्य कार्रवाई के पक्षधर रहे हैं। ट्रम्प के इस बयान से यह सवाल उठता है कि क्या यह नेतन्याहू की नीति का ही विस्तार है?
ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर भी पहले यह कह चुके हैं कि गाज़ा का समुद्र तटीय क्षेत्र पर्यटन और व्यापार के लिए एक बड़ी संभावना रखता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या गाज़ा को “सुनहरी भूमि” बनाने के लिए वहां के 20 लाख लोगों को जबरन विस्थापित कर दिया जाएगा?
ट्रंप का यह बयान मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। अमेरिका के सहयोगी देश और अरब राष्ट्र इसके खिलाफ हैं, जिससे इस प्रस्ताव का लागू होना लगभग नामुमकिन है। यदि ट्रम्प फिर से सत्ता में आते हैं, तो वह इस योजना को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे मध्य पूर्व में संघर्ष और बढ़ सकता है।
ट्रंप का यह विवादास्पद प्रस्ताव ना सिर्फ 20 लाख लोगों के भविष्य पर सवाल उठाता है, बल्कि अमेरिका की वैश्विक साख पर भी गंभीर असर डाल सकता है। अब देखना यह होगा कि यह सिर्फ एक बयानबाजी है या ट्रम्प के प्रशासन की वास्तविक नीति बनने जा रही है।
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