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सिंचाई विभाग की सख्त वसूली: पानम योजना के बकाया 4658 करोड़ रुपये भरने का अल्टीमेटम

वडोदरा नगर निगम (VMC) और राज्य सरकार के सिंचाई विभाग के बीच पानम योजना के तहत हुए करार को लेकर चल रहे विवाद में सिंचाई विभाग ने एक बार फिर नगर निगम को 4658 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि चुकाने का नोटिस भेजा है और इस राशि का तत्काल भुगतान करने का निर्देश दिया है।

वर्षों पहले निगम और सिंचाई विभाग के बीच पानम योजना के तहत एक करार हुआ था। इसके तहत निगम को हर महीने महिसागर नदी से एक निश्चित मात्रा में पानी लेकर फाजलपुर, रायका, ढोलका और पोइचा फ्रेंचवेल्स की मदद से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति करनी थी। इस करार के अनुसार, निगम की संपूर्ण सभा द्वारा निर्धारित राशि हर महीने राज्य सरकार के सिंचाई विभाग में जमा कराई जाती थी।

हालांकि, बाद में अचानक राज्य सरकार के सिंचाई विभाग ने वडोदरा नगर निगम के साथ यह करार तोड़ दिया, बिना निगम की कोई भी बात सुने। इसके बाद निगम को पानम योजना के तहत लिए गए पानी के लिए अतिरिक्त राशि चुकाने के बिल भेजे जाने लगे। निगम ने सिंचाई विभाग को अपनी आपत्ति जताते हुए कहा कि पानम योजना के करार को बिना किसी सुनवाई के रद्द किया गया है। निगम ने यह भी अनुरोध किया कि राज्य सरकार इस मामले में उनकी बात सुने और उसके बाद ही करार रद्द करे।

करार रद्द होने से निगम पर भारी बोझ

निगम ने कहा कि जब तक इस विवाद का समाधान नहीं हो जाता, तब तक वह हर महीने तय राशि राज्य सरकार के सिंचाई विभाग में जमा करता रहेगा। लेकिन सिंचाई विभाग द्वारा करार रद्द किए जाने के कारण निगम को भारी-भरकम बिल भेजे जाने लगे, जिन्हें निगम ने फिलहाल चुकाने से इनकार कर दिया है।

वर्तमान में, बकाया राशि और उस पर लगे ब्याज को मिलाकर कुल रकम 46,58,95,86,401 रुपये हो गई है। सिंचाई विभाग ने निगम को एक बार फिर से रिमाइंडर भेजा है, जिसमें कहा गया है कि यदि यह राशि समय पर नहीं भरी गई, तो इससे उत्पन्न होने वाली सभी प्रशासनिक और वित्तीय समस्याओं की जिम्मेदारी नगर निगम की होगी।

वर्षों पुराना विवाद, आज तक नहीं सुलझा

वडोदरा नगर निगम और राज्य सरकार के सिंचाई विभाग के बीच पानम योजना करार के तहत वित्तीय मामलों में उत्पन्न विवाद दशकों से चला आ रहा है। कई तत्कालीन महापौरों ने इस विवाद को सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन अब तक कोई भी पदाधिकारी इसमें सफल नहीं हो पाया है।

इस मुद्दे को लेकर नगर निगम की बैठकों और अन्य मौकों पर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का कहना है कि किसी भी हालत में इन भारी-भरकम बिलों का भुगतान बंद होना चाहिए और निगम के ऊपर से यह बड़ा भार हटना चाहिए।

कांग्रेस पार्टी ने भी सवाल उठाया है कि जब वडोदरा नगर निगम और राज्य सरकार दोनों जगह दशकों से भाजपा की सरकार है, तो इस विवाद का स्थायी समाधान क्यों नहीं निकल पा रहा है? सत्तारूढ़ दल इस सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहा है, क्योंकि वर्षों पुराने इस विवाद का कोई अंत दिखाई नहीं दे रहा है।

इसके अलावा, कांग्रेस ने यह भी मुद्दा उठाया है कि नगर निगम की बजट बैलेंस शीट में पानम योजना के बकाया बिलों का उल्लेख क्यों नहीं है। यह सवाल भी लगातार निगम की बैठकों में उठता रहा है, लेकिन अब तक इसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिल पाया है।

ऐसे में देखना होगा कि क्या सिंचाई विभाग की इस नई सख्ती के बाद कोई ठोस हल निकल पाएगा या फिर यह विवाद ऐसे ही चलता रहेगा।