भारत में वक्फ बोर्ड देश की तीसरी सबसे बड़ी भूमि धारक संस्था है, जो भारतीय रेलवे और सशस्त्र बलों के बाद सबसे अधिक संपत्ति का स्वामित्व रखती है। यह एक चौंकाने वाली हकीकत है कि वक्फ बोर्ड के पास 9.4 लाख एकड़ में फैली लगभग 8.7 लाख प्रॉपर्टीज हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके बावजूद, इन संपत्तियों से कोई विशेष आर्थिक लाभ नहीं उठाया जाता।
वक्फ क्या है?
इस्लाम में वक्फ का अर्थ ऐसी संपत्ति से है, जो जन-कल्याण के लिए समर्पित हो। इसे किसी धार्मिक, सामाजिक या परोपकारी उद्देश्य के लिए स्थायी रूप से दान कर दिया जाता है। यह संपत्ति चल या अचल दोनों प्रकार की हो सकती है, जैसे जमीन, इमारतें, धन, या अन्य संपत्तियां। वक्फ संपत्तियों का उपयोग आमतौर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, धर्मार्थ कार्यों और सामुदायिक विकास के लिए किया जाता है। भारत में वक्फ व्यवस्था कानूनी रूप से संरक्षित है, लेकिन इसके प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
वक्फ संशोधन विधेयक 2024: क्या बदलेगा?
केंद्र सरकार ने 8 अगस्त 2024 को वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill) का ऐलान किया था, जिसके साथ मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 भी पेश किया गया। इन विधेयकों का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार करना और बोर्ड के कार्यों को व्यवस्थित करना है।
लोकसभा में यह विधेयक आज पेश किया गया और इस पर करीब 8 घंटे तक बहस चलेगी। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि वह चाहते हैं कि इसे जल्द से जल्द पारित किया जाए।
इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य वक्फ अधिनियम, 1995 में सुधार कर इसकी परिभाषा को अपडेट करना, पंजीकरण प्रक्रियाओं में बदलाव लाना और तकनीक को जोड़कर संपत्ति प्रबंधन को पारदर्शी बनाना है।
उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक वक्फ संपत्ति
भारत में वक्फ बोर्ड की सबसे अधिक संपत्तियां उत्तर प्रदेश में हैं। यहाँ वक्फ बोर्ड की कुल अचल संपत्ति का 27% हिस्सा मौजूद है, जिसमें 2,32,547 अचल संपत्तियां शामिल हैं। अन्य राज्यों में:
- पंजाब और पश्चिम बंगाल में 9%
- तमिलनाडु में 8%
- केरल, तेलंगाना और गुजरात में 5%
- कर्नाटक में 7%
वक्फ संपत्तियों का सही इस्तेमाल क्यों नहीं?
2006 में आई सच्चर समिति की रिपोर्ट के अनुसार, यदि इन संपत्तियों का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो हर साल कम से कम 12,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया जा सकता है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि वक्फ प्रबंधन को सुधारने के लिए:
- प्रत्येक राज्य वक्फ बोर्ड (SWB) और केंद्रीय वक्फ परिषद (CWC) में दो महिला सदस्यों को शामिल किया जाए।
- CWC/SWB में संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति की जाए।
- वक्फ संपत्तियों की वित्तीय लेखा परीक्षा कराई जाए।
वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवाद और चुनौतियां
सितंबर 2024 में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने बताया कि वक्फ ट्रिब्यूनल में 40,951 मामले लंबित हैं। इनमें से 9,942 मामले मुस्लिम समुदाय के सदस्यों द्वारा वक्फ का प्रबंधन करने वाली संस्थाओं के खिलाफ दायर किए गए हैं। इन मामलों के निपटारे में देरी एक बड़ी समस्या बनी हुई है, साथ ही ट्रिब्यूनल के फैसलों पर कोई न्यायिक निगरानी नहीं होती।
क्या वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग संभव है?
वक्फ बोर्ड की संपत्तियां, यदि सही तरीके से प्रबंधित की जाएं, तो यह शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। तुर्की, लीबिया, जॉर्डन, ट्यूनीशिया और मिस्र जैसे कई इस्लामी देशों में वक्फ सिस्टम नहीं है, जबकि भारत में यह कानूनी रूप से संरक्षित है। हालांकि, इसका दुरुपयोग और पारदर्शिता की कमी इसे विवादों में बनाए रखती है।
सरकार के नए संशोधन से यह उम्मीद की जा सकती है कि वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग होगा और इससे समाज को वास्तविक लाभ मिलेगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विधेयक पारित होने के बाद वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली में कितने बदलाव आते हैं।

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