गुजरात के बनासकांठा जिले के डिसा स्थित GIDC क्षेत्र में 1 अप्रैल को एक पटाखा फैक्ट्री और गोदाम में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस दर्दनाक हादसे में 21 मज़दूरों की मौत हो गई, जिनमें 5 से 8 साल तक के बच्चे भी शामिल थे। सभी मृतक मध्य प्रदेश के हरदा और देवास जिलों से थे।
18 शवों का एक साथ अंतिम संस्कार
मंगलवार को मध्य प्रदेश के देवास ज़िले के नेमावर घाट पर 18 मृतकों का सामूहिक अंतिम संस्कार किया गया। प्रशासन द्वारा पूरे विधि-विधान से शवों को मुखाग्नि दी गई। हादसे के दो शवों की पहचान नहीं हो पाने के कारण उनका डीएनए टेस्ट कराया जाएगा, वे शव फिलहाल गुजरात में ही रखे गए हैं।
विस्फोट इतना भीषण कि शरीर के अंग 50 मीटर दूर तक बिखर गए
हादसा उस वक्त हुआ जब सुबह करीब 8 बजे GIDC क्षेत्र में स्थित एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में शक्तिशाली विस्फोट हुआ। धमाका इतना तेज़ था कि फैक्ट्री की दीवारें गिर गईं और आसपास की ज़मीन पर शरीर के टुकड़े बिखर गए। खेतों से भी मानवीय अंग बरामद किए गए।
इस हादसे में हरदा के हंडिया के 8, देवास के संदलपुर के 9 मज़दूर, और खातेगांव के एक कॉन्ट्रैक्टर की मौत हो गई।
घायलों की हालत गंभीर
वर्तमान में 8 मज़दूर अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 3 की हालत नाजुक बनी हुई है। घायलों का इलाज स्थानीय अस्पतालों में चल रहा है।
मालिक और बेटा गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में फैक्ट्री के मालिक खूबचंद रेनुमल मोहनानी और उनके बेटे दीपक मोहनानी को गिरफ्तार कर लिया है। इनके खिलाफ गैरइरादतन हत्या (IPC की धारा 304) समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
भावनात्मक विदाई
देवास के मृतकों के शव पहले उनके पैतृक गांव संदलपुर ले जाए गए, जहां अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीण इकट्ठा हुए। वहां से शवों को नेमावर घाट लाया गया। वहीं, हरदा जिले के हंडिया के मृतकों के शव सीधे गुजरात से नेमावर घाट भेजे गए।
अंतिम संस्कार के समय स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर मौजूद थे। पूरा इलाका शोक और मातम के माहौल में डूबा रहा। कई लोगों की आंखें नम हो गईं, क्योंकि विस्फोट इतना भीषण था

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