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‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में लालू यादव और उनके परिवार को कोर्ट का समन: 11 मार्च को पेश होना जरूरी

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को एक बड़े फैसले में लालू यादव और उनके परिवार के अन्य सदस्यों, जैसे उनके बेटे तेजप्रताप यादव और बेटी हेमा यादव को ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में समन भेजा है। इस मामले में सीबीआई द्वारा दायर अंतिम चार्जशीट के बाद कोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लिया और आरोपियों को 11 मार्च को पेश होने का आदेश दिया है।

यह मामला खासा विवादास्पद है, जिसमें भारतीय रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले भूमि सौदों के आरोप लगे हैं। सीबीआई की जांच में यह सामने आया है कि 2007 और 2008 के बीच कई भूमि सौदों को अवैध तरीके से संपन्न किया गया और इसके बदले में रेलवे में नौकरी दी गई। इस केस में कुल 79 आरोपियों में से 30 लोक सेवक भी शामिल हैं।

मुख्य भूमि सौदे जिनकी जांच हो रही है:

  1. सौदा 1: फरवरी 2008 में पटना के किशुन देव राय ने मात्र ₹3.75 लाख में 3,375 वर्ग फीट भूमि राबड़ी देवी (लालू यादव की पत्नी) को बेच दी। इसके बाद संबंधित परिवार के सदस्यों को रेलवे में नौकरी मिल गई।

  2. सौदा 2: इसी साल, पटना के संजय राय ने भी अपने भूमि का सौदा राबड़ी देवी से किया और इसके बाद उनके परिवार के अन्य सदस्यों को रेलवे में नौकरी मिली।

  3. सौदा 3: 2007 में, किरण देवी ने अपनी 80,905 वर्ग फीट भूमि केवल ₹3.70 लाख में लालू यादव की बेटी मीसा भारती को बेच दी, और इसके बाद उनके बेटे को रेलवे में नौकरी मिल गई।

  4. सौदा 4: एक और सौदा 2007 में हुआ, जिसमें एक पटना निवासी ने अपनी भूमि को एक प्राइवेट कंपनी को बेच दी, और इस कंपनी ने बाद में भूमि का अधिग्रहण लालू परिवार के नाम पर किया।

इन सौदों ने यह सवाल उठाया है कि क्या ये सभी लेन-देन राजनीतिक पदों का दुरुपयोग करने के लिए किए गए थे? सीबीआई का कहना है कि अधिकांश सौदे संदिग्ध परिस्थितियों में संपन्न हुए थे और इसके बदले रेलवे में नौकरी की पेशकश की गई।

राजनीतिक परिणाम और आने वाला रास्ता:

लालू यादव, उनके बेटे तेजप्रताप यादव और बेटी हेमा को समन भेजा जाना उनके राजनीतिक करियर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। बिहार के एक प्रमुख नेता के रूप में, यह मामला लालू यादव के लिए मुश्किलों का कारण बन सकता है। राजनीतिक दृष्टि से, यह केस बिहार के आगामी चुनावों में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।

हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि हर आरोपी को न्याय का हक है, और कोर्ट को बिना किसी बाहरी दबाव के इस मामले की निष्पक्ष सुनवाई करनी चाहिए। यदि न्यायपूर्ण तरीके से फैसला लिया जाता है, तो यह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश देगा।

‘लैंड फॉर जॉब’ मामला भारतीय राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार का एक उदाहरण है, जिसमें सत्ता का दुरुपयोग निजी फायदे के लिए किया गया। यह भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में विश्वास की कमी को भी दर्शाता है। हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए और बिना किसी राजनीतिक दबाव के फैसले सुनाए जाएं। इस मामले का परिणाम बिहार के राजनीतिक परिदृश्य को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है।

11 मार्च का दिन लालू यादव, उनके परिवार और बिहार की राजनीति के लिए अहम साबित होने वाला है। इस केस के परिणामों से यह साफ होगा कि क्या न्याय की प्रक्रिया सही ढंग से काम करती है, और यह बिहार की राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा।