CATEGORIES

April 2025
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930  
Sunday, April 6   1:01:59

वडोदरा के रक्षित चौरसिया कांड मामले बड़ा खुलासा…..

13 मार्च की रात वडोदरा के करेलीबाग इलाके में एक तेज रफ्तार फॉक्सवैगन वर्टस कार तीन गाड़ियों को रौंदते हुए निकल गई। इस हादसे में एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई और सात लोग गंभीर रूप से घायल हुए। अब जो फोरेंसिक रिपोर्ट सामने आई है, वह और भी चौंकाने वाली है। कार चला रहे रक्षित चौरसिया के शरीर में शराब नहीं, बल्कि गांजे के अंश पाए गए हैं। उसके दो साथी—प्रांशु चौहान और सुरेश भरवाड़—के ब्लड सैंपल में भी ड्रग्स की पुष्टि हुई है।

हादसे से पहले का CCTV: ड्राइविंग सीट पर जिद करके बैठा रक्षित

17 मार्च को एक CCTV फुटेज सामने आया, जिसमें रक्षित और उसका साथी सुरेश स्कूटी से सुरेश के घर आते नजर आए। रक्षित के हाथ में एक बोतल थी, जिसमें क्या था, यह साफ नहीं है, लेकिन फुटेज से साफ है कि वह नशे की हालत में था। कुछ ही मिनटों बाद एक अन्य साथी प्रांशु काले रंग की वर्टस कार लेकर वहां पहुंचा। वह ड्राइविंग सीट की ओर बढ़ा, लेकिन रक्षित ने ज़िद करके खुद ड्राइविंग सीट हथिया ली।

इसके बाद जो हुआ, वह सब जानते हैं—तेज रफ्तार में गाड़ी दौड़ाई गई, तीन वाहन टकराए, और एक मासूम महिला की जान चली गई।

आरोपी की सफाई: “मुझे ऑटोमैटिक कार चलानी नहीं आती”

आरोपी रक्षित ने बयान में दावा किया कि उसे ऑटोमैटिक कार चलाना नहीं आता और वह होलिका दहन के मौके पर अपने दोस्तों के साथ पार्टी कर रहा था। उसका कहना है कि कार की रफ्तार 50-60 किमी प्रति घंटा थी, और एयरबैग खुलने के बाद उसे कुछ दिखाई नहीं दिया। मगर सवाल यह है—गांजे के नशे में गाड़ी क्यों चलाई?

ड्रग्स + लापरवाही = जानलेवा कॉम्बिनेशन

इस केस में NDPS एक्ट 1985 और मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत केस दर्ज किया गया है। लेकिन क्या यही पर्याप्त है? ड्रग्स लेकर गाड़ी चलाना, और फिर मासूमों की जान लेना सिर्फ एक “एक्सीडेंट” नहीं है—यह हत्या जैसा गंभीर अपराध है।

 ये “एक्सीडेंट” नहीं, सिस्टम की नाकामी है

जब अमीर घरों के बिगड़े बच्चे कानून को खिलौना समझते हैं और गाड़ी को हथियार बना लेते हैं, तो सवाल कानून से भी बड़ा बन जाता है। क्या महंगी कार, रसूख और ड्रग्स का नशा इंसानियत से ऊपर हो गया है?

सरकार और समाज दोनों को अब सतर्क होना पड़ेगा। NDPS एक्ट के तहत सिर्फ मामला दर्ज करना काफी नहीं—ऐसे मामलों में सख्त सज़ा और सार्वजनिक सुनवाई होनी चाहिए। ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम की समीक्षा हो, और वाहन मालिकों की जिम्मेदारी तय हो।