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Sunday, April 6   4:33:51

दिल्ली चुनाव से पहले AAP को बड़ा झटका, LG ने केजरीवाल के साथ खेला खेल

दिल्ली शराब नीति घोटाले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ केस चलाने के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को इजाजत दे दी है। यह मंजूरी 5 दिसंबर को मांगी गई थी, और अब केजरीवाल पर मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत केस शुरू किया जाएगा।

इससे पहले, केजरीवाल को इस मामले में 21 मार्च को ED ने गिरफ्तार किया था, लेकिन उन्हें बाद में जमानत मिल गई थी। हालांकि, ED केस का ट्रायल नहीं शुरू कर पाई थी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर में यह आदेश दिया था कि सरकारी अनुमति के बिना पब्लिक सर्वेंट पर PMLA के तहत केस नहीं चलाया जा सकता। इसके बाद ही ED ने राज्यपाल से इजाजत मांगी, जो अब मिल गई है।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि अगर ED के पास इजाजत की कॉपी है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए। उनका आरोप है कि यह सब बाबा साहब अंबेडकर के सम्मान से ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है, क्योंकि केजरीवाल ने हाल ही में अंबेडकर स्कॉलरशिप योजना की शुरुआत की है।

क्या है पूरा मामला?

इस साल मार्च में ED ने केजरीवाल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था और उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें तिहाड़ जेल भेजा गया था, जहां उन्होंने 156 दिन बिताए। केजरीवाल के खिलाफ केस चलाने के लिए पहले राज्य सरकार की अनुमति जरूरी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था।

इसके बाद, राज्यपाल ने अब इस मामले में ED को अनुमति दे दी है, और AAP ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव नजदीक

दिल्ली विधानसभा चुनाव का कार्यकाल फरवरी 2025 में समाप्त हो रहा है, और अगले दो महीनों में चुनाव हो सकते हैं। केजरीवाल की पार्टी AAP 2020 में 70 में से 62 सीटों पर विजय प्राप्त कर चुकी है, और इस बार भी चुनावी रणभूमि में पार्टी के लिए यह मुद्दा अहम हो सकता है।

इससे यह साफ है कि आने वाले समय में दिल्ली की राजनीति में यह मामला और भी गरमाएगा, और इससे जुड़ी घटनाओं से आगामी चुनावों की दिशा प्रभावित हो सकती है।

यह मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी भी है। जहां एक ओर ED और दिल्ली सरकार की लड़ाई जारी है, वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी का आरोप है कि यह सब चुनावी फायदा लेने के लिए किया जा रहा है। मामले की गहराई और दोनों पक्षों के दावों को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर और भी सियासी बवाल मच सकता है।