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अल्बर्ट आइंस्टीन को भी यहुदी होने पर सहना पड़ा था सितम, दुनिया के सबसे बुद्धिमान शख्स हुए थे वतन छोड़ने को मजबूर

हर नफरत का अंत विनाश की ओर ही लेकर जाता है। इसका सही उदाहरण इजरायल पर हमास का आतंकी हमला है। जिसमें हजारों मासूमों ने अपनी जान गंवादी। ये हमला इजरायल पर हुआ अब तक का सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है। ऐसे में हर शख्स उस इतिहास को खुरच रहा है जो इन सब का कारण है। दरअसल यहूदियों का इतिहास ही संघर्षों से भरा है। यहूदी धर्म के प्रवर्कत हजरत मूसा को भी मिस्र में हुए भीषण अत्याचारों के कारण छठी शताब्दी ईसा पूर्व में पलायन करने की नौबत आ गई थी। इसके बाद वे पूरे समुदाय के साथ इजरायल आ गए जहां उनकी पवित्र धरती थी। इतना ही नहीं इसके बाद 70 ईसवी में रोम साम्राज्य के अत्याचारों के कारण दूसरी बार यहूदी समुदाय को पलायन करना पड़ा जिसके बाद वे दुनिया भर में फैल गए।

इजरायल से खदेड़े जाने के बाद यहूदी भारत, रूस, जर्मनी, ब्रिटेन सहित अलग-अलग देशों में बस गए। लेकिन, इसके बाद भी यहूदी समुदाय होने की वजह से उन्हें भेद-भाव का सामना करना पड़ा। उनमें से एक ही एक हैं दुनिया का सबसे बुद्धिमान शख्स अल्बर्ट आइंस्टीन जिन्हें यहुदी होने की वजह से हिटलर द्वारा कई प्रताड़नाएं दी गई। इसकी वजह से उन्हें जर्मन छोड़कर अमेरिका जाना पड़ा।

दरअसल जर्मनी में जब हिटलर का शासन था तब भी वहां के यहूदी समुदाय के नागरिकों को भेदभाव का शिकार होना पड़ा था। हिटलर भले ही धर्म के हिसाब से अत्याचार नहीं करता था, लेकिन वह आर्य नस्ल की शुद्धता पर विश्वास रखता था। और इसी का शिकार यहूदी भी हुए। हिटलर यहूदियों को गैर-आर्य मानता था। हिटलर के शासन के दौरान अल्बर्ट आइंस्टीन भी जर्मनी में ही रहते थे। वहीं से उन्होंने अपनी फेमस ‘थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी’ भी दी थी। आइंस्टीन की थ्योरी भले ही भौतिक विज्ञान के लिए नया आयाम हो लेकिन, हिटलर ने उसे यहूदी सिद्धांत करार दिया था। नौबत ये थी की उनकी किताबों को जलाने तक के प्रयास किए गए। इसके अलावा उनकी काट के लिए 100 से अधिक वैज्ञानिकों के सिद्धांत प्रकाशित किए गए लेकिन, आइंस्टीन का काट नहीं मिल पाया।

हिटलर द्वारा यहूदियों पर अत्याचार लगातार बढ़ते जा रहे थे। हालात जिंदगी और मौत के हो गए थे। इससे परेशान होकर 1932 में आइंस्टीन ने देश को अलविदा कह दिया और अमेरिका जा पहुंचे। जर्मनी में आइंस्टीन के लिए कितना पड़ा खतरा था ये इससे माना जा सकता है कि उनके पलायन के बाद एक नाजी मैगजीन में उनकी फोटो छपी थी, जिसमें लिखा था कि अब तक फांसी नहीं मिल पाई। माना जाता है कि हिटलर के शासन में उनके सिर पर इनाम तक का ऐलान था। जर्मनी के तानाशाह को यहूदियों से इतनी नफरत थी कि वो उनका नाम और वजूद दोनों ही धरती से मिटा देना चाहता था। इतिहास में दुनिया के सबसे बुद्धिमान शख्स पर घटित ये घटनाए मायने रखती हैं। इससे ज्ञात होता है कि धार्मिक और नस्लीय कट्टरता किस हद तक घातक हो सकती है।

इस घटना के बाद आइंस्टीन अमेरिका आकर न्यू जर्सी में बस गए। उनके कारण ही उस स्थल को फिजिक्स का मक्का माना जाने लगा। इतना ही नहीं उस दौरान अखबारों में भी छपा था कि फिजिक्स के पोप जर्मन छोड़कर न्यूजर्सी में बस गए।