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छत्तीसगढ़ की सियासत पर एक नजर

दशकों पुरानी मांग के जवाब में खनिजों से भरे राज्य छत्तीसगढ़ को नवंबर 2000 में मध्य प्रदेश से अलग किया गया था। तब से दो दशकों में राज्य की राजनीति मुख्य रूप से इसके मुख्यमंत्रियों अजीत जोगी, रमन सिंह और भूपेश बघेल के आसपास केंद्रित रही है।
जब एमपी का बंटवारा हुआ तो अविभाजित राज्य के सीएम दिग्विजय सिंह थे। नए राज्य में जो 90 सीटें गईं उनमें से कांग्रेस के पास 48 विधायक थे। नए राज्य के गठन के बाद रायपुर में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में अजीत जोगी को नेता चुना गया।छत्तीसगढ़ के सदाबहार राजनेता अजीत जोगी ने 9 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ के पहले सीएम के रूप में शपथ ली। एक आईएएस अधिकारी रहे जोगी ने रायपुर, इंदौर और सीधी जैसे जिलों के कलेक्टर के रूप में काम किया था। जोगी 1986 में तत्कालीन एमपी सीएम अर्जुन सिंह की सलाह पर कांग्रेस में शामिल हुए थे। सीएम बनने के बाद उन्होंने बीजेपी में दलबदल कराया और उसके 13 विधायकों को कांग्रेस में शामिल कराने में कामयाब रहे।
जोगी मई 2020 में अपनी मौत से पहले तक राजनीति में सक्रिय थे- कभी कांग्रेस के साथ तो कभी अपनी पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के साथ।
नए राज्य के पहले भाजपा अध्यक्ष प्रमुख ओबीसी नेता ताराचंद साहू थे। जोगी के दलबदल के बाद पार्टी के कई नेता उनसे नाखुश थे और साहू की जगह लेने के लिए केंद्र में तत्कालीन राज्य मंत्री रमन सिंह को भेजा गया था। 2003 का विधानसभा चुनाव रमन सिंह के नेतृत्व में जीता गया और उन्होंने नए सीएम के रूप में शपथ ली।
लगातार तीन विधानसभा चुनाव और 2014 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस ने महेंद्र कर्मा की हत्या के बाद पहले चरण दास महंत को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया और फिर कुछ ही महीनों में उनकी जगह ओबीसी नेता भूपेश बघेल को नियुक्त किया गया। 2018 के चुनावों के लिए कांग्रेस ने एक नई रणनीति तैयार की, जिसमें नए नेताओं को शामिल किया गया। पार्टी ने 68 सीटों के ऐतिहासिक बहुमत के साथ चुनाव जीता। बीजेपी सिर्फ 15 सीटें जीतने में कामयाब रही। 17 दिसंबर, 2018 को भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
2014 के लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ में भाजपा के रमन सिंह और कांग्रेस के अजीत जोगी के बीच टक्कर थी जिसमें भाजपा को छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीट में से 10 सीट मिली जबकि कांग्रेस को सिर्फ एक,
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 9 सीट मिली और कांग्रेस को दो..
अब 2024 के लोकसभा चुनाव के परिणामों पर सभी की निगाहें हैं।