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रविचंद्रन अश्विन ने क्रिकेट से लिया संन्यास, भारत के लिए बने दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज

भारतीय क्रिकेट के शानदार ऑफ-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने बुधवार को इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान किया। अश्विन ने तीनों फॉर्मेट मिलाकर कुल 287 मैच खेले और 765 विकेट हासिल किए, जिससे वह भारत के दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए। इस सूची में उनसे आगे केवल अनिल कुंबले हैं, जिन्होंने अपने करियर में 953 विकेट झटके थे।

38 वर्षीय अश्विन ने गाबा में खेले गए टेस्ट मैच के बाद अपनी रिटायरमेंट की घोषणा की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में, जहां वह भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा के साथ उपस्थित थे, अश्विन ने कहा, “आज भारतीय टीम के क्रिकेटर के तौर पर मेरा अंतिम दिन था। हालांकि, मैं क्लब क्रिकेट खेलता रहूंगा।”

रोहित शर्मा का बयान:

भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने अश्विन के रिटायरमेंट पर कहा, “जब मैं पर्थ आया था तो अश्विन ने मुझे अपने रिटायरमेंट की बात बताई थी। मैंने उन्हें पिंक बॉल टेस्ट तक टीम में बने रहने के लिए मनाया था। किसी भी खिलाड़ी का निर्णय सम्मानजनक होना चाहिए और उनका निर्णय हमारे लिए गर्व की बात है। वह अब भारत लौटेंगे।”

अश्विन का करियर:

अश्विन ने 2010 में श्रीलंका के खिलाफ वनडे क्रिकेट में डेब्यू किया था। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 106 मैचों में 537 विकेट हैं। इसके अलावा, उन्होंने वनडे क्रिकेट में 156 विकेट और टी-20 क्रिकेट में 72 विकेट चटकाए। अश्विन एक बेहतरीन बल्लेबाज भी रहे हैं, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 3503 रन बनाए और छह शतक जमाए। उनका फर्स्ट क्लास क्रिकेट रिकॉर्ड भी शानदार है, जिसमें उनके नाम आठ शतक हैं।

रिकॉर्ड्स:

अश्विन के नाम टेस्ट क्रिकेट में 37 फाइव विकेट हॉल हैं, जो किसी भी भारतीय गेंदबाज द्वारा सबसे ज्यादा हैं। इसके अलावा, उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ सबसे ज्यादा विकेट लिए हैं, जहां उन्होंने 53 मैचों में 150 विकेट चटकाए। विदेशों में उनकी सबसे बड़ी सफलता ऑस्ट्रेलिया में रही, जहां उन्होंने 38 मुकाबलों में 71 विकेट हासिल किए।

अश्विन का प्रभाव:

रविचंद्रन अश्विन का करियर भारत क्रिकेट में एक मील का पत्थर रहेगा। उनकी विविधता, तकनीक और बौद्धिक क्षमता ने उन्हें दुनिया के सबसे बेहतरीन स्पिन गेंदबाजों में शुमार किया। उन्होंने भारतीय क्रिकेट को न केवल मैच जितवाए, बल्कि टीम के लिए कई ऐतिहासिक जीत में भी अहम भूमिका निभाई।

अश्विन का संन्यास निश्चित रूप से भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा क्षण है, लेकिन उनका प्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जाएगा। उनका रिकॉर्ड और योगदान भारतीय क्रिकेट को हमेशा प्रेरित करेंगे। उनका करियर भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम अध्यायों में हमेशा शामिल रहेगा। अब यह देखना होगा कि भारतीय क्रिकेट में उनकी जगह कौन भर पाएगा।

क्या संन्यास का यह समय सही था?

जहां कुछ लोग मानते हैं कि अश्विन के पास अभी भी कुछ अच्छे साल थे, वहीं अन्य लोग इसे उनके शानदार करियर का एक आदर्श अंत मानते हैं। जैसे भी हो, उनका संन्यास भारतीय क्रिकेट के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।