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लोकसभा के बाद आज राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) बिल पर मोदी सरकार की अग्निपरीक्षा

केंद्र सरकार ने वक्फ कानून में संशोधन के लिए लोकसभा में एक विधेयक पेश किया था, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्षी इंडिया गठबंधन ने इस बिल का विरोध किया, जबकि एनडीए से जुड़े दलों ने इसका समर्थन किया। यह बिल केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा पेश किया गया था और चर्चा के बाद इसे लोकसभा में पारित कर दिया गया। अब इसे आज, गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। हालांकि, केंद्र सरकार को राज्यसभा में ज्यादा मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा क्योंकि उसे एनडीए में शामिल जेडीयू, टीडीपी, शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और एनसीपी का समर्थन मिलेगा।

राज्यसभा में बिल पेश करेंगे किरेन रिजिजू

संसदीय और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू आज दोपहर 1 बजे राज्यसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश करेंगे। वर्तमान में राज्यसभा में कुल 236 सांसद हैं, इसलिए बहुमत के लिए 119 सांसदों का समर्थन जरूरी होगा। राज्यसभा में भाजपा के 98 सांसद हैं।

राज्यसभा में संख्याबल का गणित

राज्यसभा में कुल 236 सदस्य हैं, जिनमें भाजपा के 98 सांसद शामिल हैं। अगर पूरे एनडीए गठबंधन की बात करें तो इसकी संख्या लगभग 115 तक पहुंचती है। इसके अलावा, छह नामित सांसद जो आमतौर पर सरकार के पक्ष में मतदान करते हैं, उन्हें जोड़ने पर यह संख्या 121 हो जाती है, जो कि आवश्यक 119 के बहुमत से दो अधिक है।

राज्यसभा में कांग्रेस के 27 सांसद हैं और इंडिया गठबंधन के अन्य घटक दलों के 58 सांसद हैं। इस तरह, विपक्ष के पास कुल 85 सांसद हैं। वहीं, वाईएसआर कांग्रेस के 9, बीजेडी के 7 और एआईएडीएमके के 4 सांसद हैं। इसके अलावा, तीन निर्दलीय या छोटे दलों के सांसद ऐसे हैं जो न तो सरकार के पक्ष में हैं और न ही विपक्ष के साथ।

लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल को मिली थी मंजूरी

किरेन रिजिजू ने 8 अगस्त 2024 को लोकसभा में यह विधेयक पेश किया था, लेकिन विपक्ष के हंगामे के बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया गया। जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली जेपीसी की रिपोर्ट के बाद, कैबिनेट ने संशोधित विधेयक को मंजूरी दी।

इससे पहले, लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित हो चुका है। लोकसभा में इस पर मतदान हुआ, जिसमें कुल 464 मतों में से 288 विधेयक के पक्ष में और 232 विरोध में पड़े। लोकसभा में इस विधेयक पर 12 घंटे से अधिक समय तक बहस हुई थी। संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू और विपक्षी सांसदों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश की थीं।

अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा और वहां से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।