मेरठ में हुए सौरभ राजपूत हत्याकांड के 27 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इस जघन्य अपराध के रहस्यों की परतें अभी भी खुल रही हैं। सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने मिलकर न केवल हत्या को अंजाम दिया, बल्कि उसे छिपाने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। फोरेंसिक टीम और पुलिस की जांच में ऐसे-ऐसे सबूत सामने आए हैं, जो इस मामले को और भी भयावह बना देते हैं।
सूटकेस में नहीं आई लाश, ड्रम में भरा शव
हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने की योजना पहले सूटकेस में भरकर कहीं दूर ले जाकर फेंकने की थी, लेकिन सौरभ का शव सूटकेस में समा नहीं पाया। इसके बाद मुस्कान ने ड्रम खरीदा और उसमें शव के टुकड़े भरकर सीमेंट से सील कर दिया। ये योजना उनकी क्रूर मानसिकता को दर्शाती है। फोरेंसिक जांच में सूटकेस और ड्रम, दोनों पर खून के निशान मिले।
ब्लीचिंग पाउडर से मिटाने की कोशिश
हत्या के बाद कमरे में फैले खून के निशानों को छिपाने के लिए साहिल और मुस्कान ने ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल किया। हालांकि, फोरेंसिक एक्सपर्ट्स ने बेंजाडीन टेस्ट और ल्यूमिनॉल केमिकल की मदद से दीवारों, फर्श और बाथरूम में खून के निशान खोज निकाले।
गला रेतने के 10-12 वार, चाकू पर फिंगरप्रिंट
मुस्कान और साहिल ने सौरभ का गला 10-12 बार रेता, जिससे खून पूरे कमरे में फैल गया। जांच में हत्या में इस्तेमाल किए गए चाकुओं पर साहिल और मुस्कान के फिंगरप्रिंट भी मिले हैं। यही नहीं, पुलिस को ड्रम से शव के टुकड़ों के साथ ही ये चाकू भी बरामद हुए।
जुर्म छिपाने की नाकाम कोशिश
हत्या के बाद मुस्कान ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शिमला और मनाली की तस्वीरें और वीडियो अपलोड किए, जिससे ये आभास हो कि वे छुट्टियों पर हैं। 13 दिनों तक उसने इंस्टाग्राम पर लगातार पोस्ट कर लोगों को गुमराह किया। हालांकि, 18 मार्च को सौरभ के भाई राहुल के संदेह के बाद पुलिस ने इस कांड की परतें खोलनी शुरू कर दीं।
कबूलनामा और साइबर सबूत
साहिल और मुस्कान दोनों ने पुलिस कस्टडी में अपने गुनाह कबूल कर लिए हैं। उनके बयानों को ‘ई-साक्ष्य’ ऐप पर सुरक्षित किया गया है। पुलिस ने लोकेशन ट्रैकिंग और स्नैपचैट चैट्स की भी जांच की, जिससे हत्या की प्लानिंग के पुख्ता सबूत मिले।
क्या कहती है इंसानियत?
इस हत्याकांड ने समाज को झकझोर दिया है। जहां प्यार का मतलब त्याग और विश्वास होता है, वहीं साहिल और मुस्कान ने इसे हवस और अपराध में बदल दिया। प्रेम संबंधों में इस तरह के अपराध समाज के नैतिक ताने-बाने को कमजोर करते हैं। इस मामले में कठोर सजा न केवल न्याय की जीत होगी, बल्कि यह समाज के लिए एक सख्त संदेश भी देगी।
मेरठ का यह हत्याकांड उन कहानियों में से एक है, जो न केवल अपराधियों की मानसिकता को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से अपराधियों को बेनकाब किया जा सकता है। पुलिस और फोरेंसिक टीम की त्वरित और प्रभावी जांच ने इस केस में सच्चाई को सामने लाने का सराहनीय काम किया है।
इस केस की हर सुनवाई समाज के सामने यह सवाल भी खड़ा करेगी कि क्या प्रेम की आड़ में अपराध स्वीकार्य हो सकता है? या फिर इस क्रूरता का अंत समाज के सामूहिक न्यायबोध के साथ होना चाहिए?

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