मेरठ | साक्षी सिंह
मेरठ में मर्चेंट नेवी के पूर्व अधिकारी सौरभ कुमार राजपूत की निर्मम हत्या का मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस सनसनीखेज वारदात में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसका प्रेमी साहिल शुक्ला उर्फ मोहित मुख्य आरोपी हैं। इस हत्याकांड ने रिश्तों की पवित्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या प्रेम के नाम पर इंसान इस हद तक गिर सकता है कि अपने ही जीवनसाथी को निर्दयता से मार डाले?
कत्ल की खौफनाक कहानी: पहले बेहोश किया, फिर शरीर के टुकड़े कर ड्रम में भरा!
घटना 3 मार्च की रात की है, जब मुस्कान और साहिल ने मिलकर एक खौफनाक योजना बनाई। पहले सौरभ को खाने में नशीली दवा मिलाकर बेहोश किया गया। इसके बाद, जब वह बेडरूम में बेसुध पड़ा था, तो मुस्कान ने ही पहला वार किया—चाकू से अपने पति के सीने को चीर दिया। इसके बाद साहिल ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। उसने सौरभ के दोनों हाथ और सिर काटकर शरीर से अलग कर दिया। इस निर्ममता की इंतहा तब हुई जब बॉडी को ड्रम में डाला गया और उसे सीमेंट से सील कर दिया गया ताकि किसी को शक न हो।
हत्याकांड के बाद छुट्टियों का नाटक और सोशल मीडिया पर दिखावा
सिर्फ हत्या ही नहीं, बल्कि इसे छिपाने के लिए 13 दिनों तक एक सोची-समझी चाल चली गई। मुस्कान ने शिमला-मनाली घूमने का नाटक किया और इंस्टाग्राम पर तस्वीरें और वीडियो अपलोड करती रही, ताकि दुनिया को लगे कि वह मस्ती में है। दूसरी तरफ, साहिल भी आराम से रह रहा था।
जब खुला सच: बदबू ने खोल दी हैवानियत की परतें
18 मार्च को जब सौरभ के छोटे भाई राहुल ने घर आकर पूछताछ की, तो मुस्कान उसे बहलाने की कोशिश करती रही। लेकिन घर से उठ रही दुर्गंध ने उसकी झूठी दुनिया को पल भर में ढहा दिया। जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो इस भयानक कत्ल की परतें खुलने लगीं।
जेल में बेचैनी: नशे की लत ने उड़ा दी रातों की नींद
गिरफ्तारी के बाद 19 मार्च को मुस्कान और साहिल को मेरठ जेल भेजा गया। वहां उनकी असलियत एक बार फिर सामने आई—वे गांजे के नशे के आदी थे और जेल में यह न मिलने से तड़पने लगे। मुस्कान गुमसुम रहने लगी, खाना नहीं खाया और रातभर करवटें बदलती रही। साहिल भी बेचैन नजर आया। 4 दिन बीतते-बीतते उसकी हालत इतनी खराब हो गई कि उसे जेल अस्पताल में चेकअप कराना पड़ा।
मुस्कान के गर्भवती होने की खबर के बीच जेल प्रशासन उसका प्रेग्नेंसी टेस्ट कराने की तैयारी कर रहा है। इस बीच, जेल अधिकारियों ने दोनों की काउंसलिंग कराई, ताकि वे सामान्य हो सकें।
सवाल जो सोचने पर मजबूर करते हैं…
1. क्या मोहब्बत का मतलब हैवानियत हो सकता है? प्यार के नाम पर एक पत्नी इतनी निर्दयी कैसे हो सकती है कि अपने ही पति की हत्या कर दे?
2. क्या नशे ने इंसानों को इस हद तक बर्बाद कर दिया है कि वे रिश्तों की कद्र भी भूल गए हैं?
3. अगर हत्या पहले से प्लान थी, तो क्या कानून इसे फांसी लायक अपराध नहीं मानेगा?
4. क्या हमारी न्याय व्यवस्था इतनी कठोर होगी कि ऐसे दरिंदों को ऐसा सबक मिले, जिससे कोई और ऐसा जघन्य अपराध करने से पहले सौ बार सोचे?
दरिंदगी पर दया कैसी?
यह मामला केवल एक हत्या नहीं, बल्कि इंसानियत के पतन का संकेत है। एक पत्नी, जो अपने पति की हत्यारी बनी। एक प्रेमी, जो अपने ही प्रेम के नाम पर निर्दयता की सारी सीमाएं लांघ गया। और एक समाज, जहां नशा इस कदर हावी है कि लोग अपने ही परिवार को खत्म करने से नहीं हिचकते।
ऐसे मामलों में कानून को और सख्त होना चाहिए। अगर मुस्कान और साहिल को जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सजा नहीं मिली, तो यह समाज के लिए एक खतरनाक संदेश होगा कि अपराध करोगे और बच निकलोगे।
तो सवाल यह है—क्या कानून इस बार न्याय करेगा या फिर इंसानियत का कत्ल यूं ही जारी रहेगा?

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