पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को कोलकाता में पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। ममता ने कहा कि भाजपा ने दिल्ली और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में फर्जी वोटरों का सहारा लिया और इसके लिए चुनाव आयोग की मदद भी प्राप्त की। ममता ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं ने चुनाव आयोग के ऑफिस में बैठकर फर्जी वोटर लिस्ट तैयार की, जिसमें गुजरात और हरियाणा से बड़े पैमाने पर फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े गए। उनका दावा था कि विपक्ष इस साजिश का पता नहीं लगा सका, जबकि यह सच्चाई सामने आ चुकी है।
ममता ने पश्चिम बंगाल के लोगों से अपील की कि वे वोटर लिस्ट की जांच करें, क्योंकि भाजपा NRC और CAA के नाम पर सही मतदाताओं को हटा सकती है और इस तरह टीएमसी को हराने की कोशिश कर सकती है। मुख्यमंत्री ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को वोटर लिस्ट को सही करने और फर्जी मतदाताओं को हटाने के लिए एक समिति बनाने का निर्देश दिया। अगर जरूरत पड़ी, तो ममता ने चुनाव आयोग के ऑफिस के सामने धरने की भी चेतावनी दी, जैसा कि उन्होंने नंदीग्राम में भूख हड़ताल के दौरान किया था।
इसके अलावा, ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर एक और हमला करते हुए कहा कि भारत के नागरिकों को अमेरिका से जंजीरों में बांधकर वापस भेजना शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि जब कोलंबिया अपने नागरिकों के लिए विमान भेज सकता है, तो भारत ऐसा क्यों नहीं कर सकता।
ममता ने पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जिसमें वे 294 में से 215 सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित कर रही हैं। 2021 में टीएमसी ने 213 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को 77 सीटें प्राप्त हुई थीं।
इससे जुड़ी एक और खबर में, ममता के भतीजे और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भाजपा में शामिल होने की खबरों को अफवाह बताया और कहा कि वे टीएमसी के वफादार सिपाही हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं, वे झूठ बोल रहे हैं। अभिषेक ने भाजपा के उन नेताओं को धोखेबाज करार दिया, जिन्होंने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा, जैसे मुकुल रॉय और सुवेंदु अधिकारी।
ममता बनर्जी का आरोप गंभीर है और अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। चुनावों में फर्जी वोटिंग और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस प्रमाण की आवश्यकता है। चुनाव आयोग को इस मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए और हर तरह की साजिश को बेनकाब करना चाहिए। अगर किसी दल या नेता ने लोकतंत्र के इस पवित्र प्रक्रिया को भ्रष्ट किया है, तो उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
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